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Price: Rs. 325 |
उत्पीड़ितो का शिक्षाशास्त्र पाओलो फ्रेरे यह पुस्तक उस परंपरागत अर्थ मैं शिक्षाशास्त्र का विवेचन नहीं है, जिस अर्थ में बी एड और एम एड की पाठ्य पुस्तकों में हमें देखने को मिलता है| इसमें विवेचित शिक्षाशास्त्र का आधार काफी व्यापक है| पिछले ढाई दशको के दौरान ज्ञान की बिभिन शाखाओ के चिंतन को प्रभावित करने वाली विश्व की यह अनोखी पुस्तक है|
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![]() Price: Rs. 475 /225 |
गरीब बच्चों की शिक्षा बीट्रीस एवालॉस (संपादक) शिक्षा की दृष्टि से तीसरी दुनिया के ज्यादातर देश विचित्र संकट के दौर से गुजर रहे हैं| इन देशों में स्कूल शिक्षा और भी खराब हालत में है| अध्यापको को खराब परिवेश में काम करना पडता है और उससे भी कहीं अधिक खराब परिवेश में छात्रों को पढ़ना पडता है| इन सब का नतीजा बहुत त्रासद होता है, यानि खराब शिक्षण, गुणवत्ताविहीन शिक्षा और हर साल अनुतीर्ण होने वाले छात्रों की बहुत बड़ी संख्या भौतिक और मानव संसाधनों की बर्बादी का संकेत देतें हैं|
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रवीन्द्रनाथ का शिक्षाशास्त्र रवीन्द्रनाथ ठाकुर शिक्षा के विमर्श में व्यापक रूप से उथलापन आज किसी को चौकाता नहीं है | यह हमारे लिए चिंता का विषय है | आज के शिक्षव्यव्स्थापको में न तो रुढियों से हटने का साहस है, न उनकी प्राथमिकताएं स्पष्ट है | उनकी शिक्षा की व्यख्या में शब्दाडंबर की भरमार है |
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बच्चो से बातचीत गैरथ बी मैथ्यूज बच्चो से बातचीत करना कोई नई बात नहीं है | अक्सर हम बच्चो से बातें करते ही रहतें हैं ; कभी अभिभावक के रूप में, कभी दादा – दादी के रूप में, कभी चाचा – ताऊ के रूप में और कभी शिक्षक के रूप में| इस बातचीत की विषयवस्तु प्रायः एक सी होती है | हम अपनी बातचीत में उनको कुछ न कुछ करने के लिए कहतें रहते है और कभी कभी कुछ न करने की भी हिदायत देते है | कहना न होगा कि इस बातचीत से हमारा दृष्टिकोण मूलतः विधि – निषेध वाला होता है जिसका मूल उद्देश्य उनको कुछ अच्छी बात सिखाना होता है |
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